SBI Cyber Attack: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पर संभावित साइबर हमले और हजारों ग्राहकों की निजी जानकारियां लीक होने की खबरों ने देश की बैंकिंग व्यवस्था में खलबली मचा दी है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से जुड़े इस कथित मामले के सामने आने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में भी सरकार
SBI Cyber Attack: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पर संभावित साइबर हमले और हजारों ग्राहकों की निजी जानकारियां लीक होने की खबरों ने देश की बैंकिंग व्यवस्था में खलबली मचा दी है।
देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से जुड़े इस कथित मामले के सामने आने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में भी सरकार की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इस संवेदनशील घटनाक्रम ने देश भर के करोड़ों बैंक ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।
पूर्व विधायक ने सरकार को घेरा
छत्तीसगढ़ के पूर्व संसदीय सचिव एवं पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र की मोदी सरकार की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि देश के सबसे प्रतिष्ठित और सबसे बड़े बैंक के ग्राहकों का व्यक्तिगत डेटा ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे बड़े-बड़े दावों पर सवाल उठना पूरी तरह से स्वाभाविक और जायज है।
3,897 ग्राहकों का गोपनीय डेटा चोरी होने का दावा
सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित जानकारियों का हवाला देते हुए विकास उपाध्याय ने बताया कि इस साइबर हमले में कथित तौर पर 3,897 ग्राहकों का संवेदनशील डेटा चोरी होने का दावा किया जा रहा है। लीक हुई जानकारियों में ग्राहकों के नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस, घर का स्थायी पता, ऋण (लोन) संबंधी रिकॉर्ड और ग्राहक पहचान (KYC) से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारियां शामिल होने की बात कही जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
निजता और आर्थिक सुरक्षा पर बड़ा खतरा
पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने जोर देकर कहा कि यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह केवल तकनीक की विफलता नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों की निजता, आर्थिक सुरक्षा और पूरी बैंकिंग प्रणाली पर बने भरोसे के लिए एक गंभीर खतरा है। बैंक में जमा ग्राहकों की गाढ़ी कमाई और उनकी निजी जानकारियां सुरक्षित न रहना देश की वित्तीय स्थिरता के लिए सही संकेत नहीं है।
पूर्व संसदीय सचिव ने आगे कहा कि आज बैंकिंग से लेकर तमाम सरकारी सेवाओं तक आम नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा डिजिटल माध्यमों पर पूरी तरह उपलब्ध है। ऐसे में साइबर सुरक्षा में किसी भी प्रकार की छोटी सी भी चूक या लापरवाही लोगों को साइबर धोखाधड़ी, वित्तीय नुकसान, फर्जी पहचान (Identity Theft) और अन्य ऑनलाइन अपराधों के सीधे जोखिम में डाल देती है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
मामले में उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग
बैंकिंग सुरक्षा पर उठे इस संकट को देखते हुए विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार से स्पष्ट और सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस कथित साइबर हमले और डेटा लीक के पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच तुरंत कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके और दोषियों का पता लगाया जा सके।
ग्राहकों को सतर्क करने और सुरक्षा ऑडिट कराने की अपील
- पूर्व विधायक ने सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि:
- डेटा चोरी की वास्तविक स्थिति और प्रभावित ग्राहकों की सही संख्या पर तुरंत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
- प्रभावित ग्राहकों को समय रहते सूचित करके उनकी बैंकिंग व व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित करने हेतु जरूरी कदम उठाए जाएं।
- किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी बैंकों की साइबर सुरक्षा व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
राजनीतिक प्रचार का नहीं, राष्ट्रीय विश्वास का मुद्दा
विकास उपाध्याय ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा कोई राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों नागरिकों के अटूट विश्वास से जुड़ा सीधा मुद्दा है। सरकार को इस मामले में लीपापोती करने के बजाय पूरी गंभीरता दिखाते हुए तथ्यों के साथ देश के सामने स्थिति साफ करनी चाहिए, ताकि डिजिटल इंडिया के दौर में आम जनता खुद को असहाय और साइबर अपराधियों के भरोसे न पाए।

