Surakshit Bachpan Abhiyan: हर बच्चे का बचपन सुरक्षित और खुशहाल हो, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रायपुर जिले के 21 विद्यालयों में विशेष रूप से ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का संचालन किया गया। इस व्यापक अभियान के माध्यम से न केवल बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति
Surakshit Bachpan Abhiyan: हर बच्चे का बचपन सुरक्षित और खुशहाल हो, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रायपुर जिले के 21 विद्यालयों में विशेष रूप से ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का संचालन किया गया।
इस व्यापक अभियान के माध्यम से न केवल बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि उन्हें हर संभावित खतरे से निपटने के उपाय भी बताए गए। स्कूली स्तर पर बच्चों को सुरक्षा का पाठ पढ़ाने की इस पहल से विद्यार्थियों में अपने अधिकारों को लेकर नई समझ विकसित हुई है।
42 न्यायाधीशों ने संभाली कमान, बच्चों से किया सीधा संवाद
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें न्यायपालिका की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कुल 42 न्यायाधीशों ने विभिन्न विद्यालयों का दौरा किया और विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया। न्यायाधीशों ने बच्चों को बाल संरक्षण कानूनों, व्यक्तिगत सुरक्षा के तरीकों, ऑनलाइन माध्यमों पर बरती जाने वाली सतर्कता और किसी भी संकट की स्थिति में मिलने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विस्तार से समझाया। बच्चों ने भी उत्साह के साथ इस संवाद में हिस्सा लिया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में हो रहा है आयोजन
यह पूरा कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के मार्गदर्शन और तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। गत 10 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए इस देशव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों के साथ-साथ सहायता के उपलब्ध माध्यमों से परिचित कराना है। बच्चों को यह समझाया जा रहा है कि यदि वे किसी भी प्रकार की असुरक्षा या शोषण का सामना करते हैं, तो वे बिना डरे कैसे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कानूनी मदद प्राप्त कर सकते हैं।
जिला स्तरीय समन्वय समिति और विभिन्न विभागों की सहभागिता
रायपुर और गरियाबंद जिले में इस अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत 26 से 31 अक्टूबर तक विशेष जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग और साइबर क्राइम विभाग को शामिल करते हुए एक सशक्त जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा के दिशा-निर्देशों के तहत इन चयनित विद्यालयों में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।
रोचक गतिविधियों और नुक्कड़ नाटक के जरिए दी जा रही है जानकारी
बच्चों को संवेदनशील विषयों पर आसानी से समझाने के लिए कार्यक्रमों में कई आकर्षक विषयों को शामिल किया गया है। इनमें ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’ और ‘न बाल विवाह, न बाल शोषण’ जैसे विषय प्रमुख हैं। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग के पॉक्सो सपोर्ट पर्सन, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य और बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ बच्चों से संवाद कर रहे हैं। साथ ही, विधि महाविद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला के माध्यम से जागरूकता फैला रहे हैं।
अभियान की समाप्ति के बाद भी निरंतर जारी रहेंगी गतिविधियां
यह अभियान केवल कुछ दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दीर्घकालिक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता निर्देश दिए गए हैं। अभियान की समयावधि पूरी होने के बाद भी विद्यालयों में बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास के साथ-साथ बाल संरक्षण संबंधी जागरूकता गतिविधियां निरंतर चलती रहेंगी। इन मिले-जुले और निरंतर प्रयासों का मुख्य ध्येय बच्चों के लिए एक भयमुक्त, सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने भविष्य का निर्माण कर सकें।

