10 सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ की ‘अन्नदाता गर्जना रैली’
प्रदेशभर से हजारों किसान पहुंचे नया रायपुर, सैकड़ों महिला किसानों ने लिया भाग; महानदी भवन घेराव के लिए निकले किसानों को पुलिस ने रास्ते में रोका
नया रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के आह्वान पर किसानों की विभिन्न समस्याओं एवं 10 सूत्रीय मांगों को लेकर राजधानी रायपुर में ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ का आयोजन किया गया। प्रदेश के सभी जिलों से हजारों की संख्या में किसान आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। रैली में सैकड़ों महिला किसानों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए शासन से शीघ्र समाधान की मांग की।
इस आंदोलन में किसानों की दो प्रमुख मांगें विशेष रूप से उठाई गईं। वर्ष 2022-23 की धान खरीदी की बकाया राशि लगभग ₹1,700 करोड़ का तत्काल भुगतान तथा पिछले तीन वर्षों में धान के समर्थन मूल्य में हुई कुल ₹258 प्रति क्विंटल की वृद्धि का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उचित निर्णय लेना। भारतीय किसान संघ का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि के बावजूद राज्य में किसानों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाया है। इससे किसानों की आय प्रभावित हो रही है। संघ ने मांग की कि बकाया राशि का तत्काल भुगतान किया जाए तथा समर्थन मूल्य वृद्धि का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय महामंत्री श्री मोहिनी मोहन मिश्रा जी उपस्थित रहे। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन उनकी सहमति के बिना नहीं ली जा सकती। कृषि भूमि किसान की आजीविका और परिवार की सुरक्षा का आधार है। विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों के भूमि संबंधी अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए तथा भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों की सहमति और वैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में धान खरीदी की व्यवस्था में सुधार, किसानों की लंबित राशि का भुगतान, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा, गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने, प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेने, टोकन व्यवस्था में सुधार, गौ संरक्षण एवं संवर्धन, सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति तथा बाजार में अधिक मूल्य पर खाद बेचने वालों पर कार्रवाई सहित किसानों की विभिन्न समस्याओं को शामिल किया गया।
महानदी भवन घेराव के लिए आगे बढ़ रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। प्रदेशभर से आए किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। भारतीय किसान संघ ने शासन से आग्रह किया कि किसानों की 10 सूत्रीय मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को उनकी लंबित राशि और कृषि उपज का उचित मूल्य मिल सके तथा उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो।
भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने स्पष्ट किया कि किसानों के आर्थिक हितों, भूमि अधिकारों और कृषि व्यवस्था से जुड़े विषयों पर समाधान होने तक किसानों की आवाज शासन तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।
जारीकर्ता:
भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश
प्रदेश में किसानों की गर्जना, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर नया रायपुर में बड़ा प्रदर्शन
नया रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में किसानों की समस्याओं को लेकर आज राजधानी में बड़ा आंदोलन देखने को मिला। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के आह्वान पर 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अन्नदाता गर्जना रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में प्रदेश के सभी जिलों से हजारों किसान नया रायपुर पहुंचे। खास बात यह रही कि इस आंदोलन में सैकड़ों महिला किसानों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
रैली के बाद किसानों ने अपनी मांगों को लेकर महानदी भवन का घेराव करने की योजना बनाई थी। महानदी भवन की ओर बढ़ रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद किसानों ने वहीं पर सभा कर अपनी मांगों को लेकर शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की।
बकाया 1700 करोड़ और समर्थन मूल्य है मुख्य मुद्दा
आंदोलन में किसानों की दो प्रमुख मांगें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। पहली मांग वर्ष 2022-23 की धान खरीदी की बकाया राशि लगभग 1700 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान करने की है। दूसरी मांग पिछले तीन वर्षों में धान के समर्थन मूल्य में हुई कुल 258 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का लाभ किसानों तक पहुंचाने की है।
भारतीय किसान संघ का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में लगातार वृद्धि की गई है, लेकिन राज्य में किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। इससे सीधे तौर पर किसानों की आय प्रभावित हो रही है। संघ ने मांग की है कि बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाए और समर्थन मूल्य वृद्धि का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ठोस निर्णय ले।
किसानों की जमीन बिना सहमति के नहीं ली जा सकती – मोहिनी मोहन मिश्रा
कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री श्री मोहिनी मोहन मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन उनकी सहमति के बिना नहीं ली जा सकती। कृषि भूमि किसान की आजीविका और उसके परिवार की सुरक्षा का आधार है। विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों के भूमि संबंधी अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों की सहमति और उनके वैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना जरूरी है।
क्या हैं 10 सूत्रीय मांगें
संघ द्वारा शासन को सौंपे गए ज्ञापन में 10 मांगें शामिल हैं। इनमें धान खरीदी की व्यवस्था में सुधार, किसानों की लंबित राशि का भुगतान, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा, गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करना, प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेना, टोकन व्यवस्था में सुधार, गौ संरक्षण एवं संवर्धन, सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति देना और बाजार में अधिक मूल्य पर खाद बेचने वालों पर कार्रवाई करना शामिल है।
शासन से समयबद्ध कार्रवाई की मांग
भारतीय किसान संघ ने शासन से आग्रह किया है कि किसानों की 10 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को उनकी लंबित राशि और कृषि उपज का उचित मूल्य मिल सके।
संघ ने स्पष्ट किया है कि किसानों के आर्थिक हितों, भूमि अधिकारों और कृषि व्यवस्था से जुड़े विषयों पर समाधान होने तक किसानों की आवाज शासन तक पहुंचाने का उनका प्रयास जारी रहेगा। प्रदेशभर से आए किसानों ने भी अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

