शेयर बाजार में हुए हर्षद मेहता घोटाले के इर्द-गिर्द कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं, लेकिन “लकी भास्कर” इस घोटाले के एक अलग पहलू को उजागर करती है। इस फिल्म की कहानी भास्कर नामक एक बैंक कर्मचारी के संघर्षों और हेरफेर के सफर को दर्शाती है।
भास्कर, एक साधारण बैंक कर्मचारी, अपनी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। उसकी जिंदगी बेटे की पढ़ाई, पिता के इलाज और भाई की पढ़ाई की चिंताओं से घिरी है। कर्ज़ और लेनदारों की बातें उसकी रातों की नींद छीन लेती हैं। इसी दौरान, भास्कर की मुलाकात एंटोनी नामक व्यक्ति से होती है, जो बैंक से लोन चाहता है।
एंटोनी की कहानी से प्रभावित होकर भास्कर, बैंक से धोखाधड़ी कर उसकी मदद करता है। धीरे-धीरे यह फ्रॉड भास्कर की आदत बन जाती है। एक दिन, भास्कर का प्रमोशन हो जाता है, और वह बैंक का मैनेजर बन जाता है। यहीं से कहानी में बड़ा मोड़ आता है।
बैंक मैनेजर बनने के बाद, भास्कर को पता चलता है कि कुछ लोग “बीआर” का इस्तेमाल कर बैंक के पैसों को शेयर मार्केट में लगा के मोटा प्रॉफिट बना रहे है | वो भी इस खेल में शामिल हो जाता है और फिर हर्षद मेहता के गुर्गे सूरज से डील करता है और रातों-रात करोड़पति बन जाता है। पैसा भास्कर की जिंदगी बदल देता है उस पर पैसो की बारिश होने लगती है, लेकिन जल्द ही उसे एहसास होता है कि यह सब गलत है।
अपने किए को सुधारने की कोशिश में भास्कर को सिस्टम से टकराना पड़ता है। लेकिन जैसे कहते हैं, “सिस्टम के खिलाफ जाना सबसे बड़ा जुर्म है।” कहानी में सीबीआई की एंट्री होती है, पूछताछ शुरू होती है, और भास्कर का जीवन रोमांचक मोड़ लेता है।
फिल्म आगे बढ़ती कई मज़ेदार रोमांचक पल आते है जिसे देखकर आप के मुंह अरे वाह निकल जाए इतना सब कुछ होने के बाद भास्कर इन सब से निकल जाता है और शायद इसलिए फिल्म का नाम “लकी भास्कर” रखा गया है! अगर आप को जनान है की भास्कर इन सब से कैसे बाहर आता है तो इसके लिए आप को ये फिल्म #Netflix में देखनी पड़ेगी।
फिल्म का स्क्रीन प्ले, म्यूजिक सब कुछ परफेक्ट है। निर्देशक मोहदय की जितनी तारीफ करे उतना कम है शानदार काम है।
फिल्म के मुख्य पत्रों में सलमान दुलकिर है जिन्होंने कमाल का अभिनय किया है मीनाक्षी चौधरी साड़ी में बेहद ही खूबसूरत लगी है और उन्होंने भी अपने पात्र को बखूबी ढंग निभाया है। फिल्म में टीनू आनंद है सचिन खेडेकर है और सभी कलाकारों ने जबर्दस्त काम किया है।
बहुत दिनों के बाद रामानंद सागर के “श्रीकृष्ण” सर्वदमन डी. बैनर्जी को स्क्रीन पर देखकर अच्छा लगा।
संदीप निषाद सिनेमा के संगवारी


