Mahadev Betting App Case: महादेव ऑनलाइन सट्टा एप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को बुधवार (4 नवंबर) को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सीबीआई की टीम मंगलवार शाम करीब 6 बजे उसे लेकर रायपुर पहुंची। दिल्ली में दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पूरी होने के बाद अब जांच एजेंसी उससे पूछताछ के लिए रिमांड मांग सकती है।
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दुर्ग में महादेव सट्टे को लेकर पहली एफआईआर मार्च 2022 में दर्ज हुई थी। जामुल थाने में दर्ज इसी मामले के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया था। इस मामले में पुलिस ने धारा 173(8) के तहत चालान पेश किया है। सौरभ के खिलाफ जांच के दौरान कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे।
दुर्ग में पहली एफआईआर से खुला था नेटवर्क
महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच के दौरान दुर्ग के पुष्पक नगर में तत्कालीन सीएसपी जितेंद्र यादव और टीआई वीरेंद्र श्रीवास्तव ने छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान आलोक सिंह, खड़क सिंह, रामप्रवेश साहू, अभिषेक और पिंटू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। आलोक, खड़क सिंह और रामप्रवेश के पास से 17 बैंक खाते, 61 एटीएम कार्ड, लैपटॉप और कई मोबाइल फोन जब्त किए गए थे।
बैंक खातों से सामने आया सौरभ चंद्राकर का नाम
जब्त बैंक खातों की जांच में सौरभ चंद्राकर के खाते में लेनदेन की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने सट्टे का पैनल संचालित करने वाले आलोक सिंह का बयान दर्ज किया। इसी बयान के आधार पर सौरभ चंद्राकर, रवि उत्पल और राज गुप्ता के नाम भी केस में जोड़े गए। पुलिस की जांच में ऑनलाइन सट्टे के संचालन, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन से जुड़ी जानकारियां सामने आईं।
आलोक ने पुलिस को बताया कैसे चलता था महादेव सट्टे का काम
आलोक सिंह ने अपने बयान में बताया कि इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए उसका परिचय अभिषेक और पिंटू से हुआ था। दोनों ने उसे महादेव बुक में ऑनलाइन लेजर यूजर आईडी और पासवर्ड दिया था। इसके जरिए वह ग्राहकों की आईडी बनाकर ऑनलाइन सट्टा खिलाता था। उसकी आईडी का नाम महादेव वी9696 और पासवर्ड आलोक 9685 था।
कौन क्या करता था, आलोक ने बयान में बताया
आलोक के मुताबिक, उसका दोस्त रामप्रवेश महादेव बुक ग्रुप से आने वाले ग्राहकों की आईडी और क्वाइन का हिसाब रखता था। वह खुद ग्राहकों के भुगतान के आधार पर लैपटॉप में आईडी बनाता और क्वाइन डालता था। वहीं खड़क सिंह ग्राहकों के जीतने पर उनकी रकम खाते में जमा करने और हारने पर पैसों का हिसाब संभालने का काम करता था।
पांच लाख क्वाइन देकर शुरू कराया था काम
आलोक ने बताया कि अभिषेक और पिंटू ने उसे लेजर बुक एजी और लेजर बुक 247 डॉट कॉम पर आईडी-पासवर्ड दिया था। इसके साथ पांच लाख क्वाइन भी दिए गए थे। उसे बताया गया था कि एक क्वाइन की कीमत एक रुपये है। आलोक के अनुसार, इस काम से जुड़ने से पहले वह तीन महीने आजमगढ़ और करीब दो महीने हैदराबाद में भी काम कर चुका था।
फर्जी केवाईसी से जुटाए जाते थे बैंक खाते और सिम
आलोक ने अपने बयान में बताया कि महादेव बुक के मैनेजमेंट और ऑनलाइन साइटों के संचालन के लिए अलग-अलग बैंक खातों और सिम नंबरों की जरूरत पड़ती थी। इसके लिए वे लोग फर्जी केवाईसी के जरिए बाजार से खाते और सिम हासिल करते थे। उसने बताया कि तीनों ने मिलकर योजना बनाई और अभिषेक-पिंटू के जरिए इस काम से जुड़े थे।
सौरभ, रवि उत्पल और राज गुप्ता का भी लिया नाम
आलोक के पुलिस को दिए गए मेमोरेंडम बयान के मुताबिक, अभिषेक और पिंटू ने उसे बताया था कि सौरभ चंद्राकर, रवि उत्पल और राज गुप्ता भी महादेव बुक का काम करते हैं। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने इन तीनों के नाम मामले में शामिल किए थे।

