Maa Mankeshwari Devi Temple: छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला जहां शरद पूर्णिमा पर 500 साल पुरानी परंपरा निभाई गई। यह परंपरा करमागढ़ स्थित मां मानकेश्वरी देवी मंदिर का है। जहां बकरों की बलि देने के बाद बैगा खून पीता है। जिसका एक वीडियो भी सामने आया है। मान्यता है कि, इस वक्त बैगा के शरीर में
Maa Mankeshwari Devi Temple: छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला जहां शरद पूर्णिमा पर 500 साल पुरानी परंपरा निभाई गई। यह परंपरा करमागढ़ स्थित मां मानकेश्वरी देवी मंदिर का है। जहां बकरों की बलि देने के बाद बैगा खून पीता है। जिसका एक वीडियो भी सामने आया है। मान्यता है कि, इस वक्त बैगा के शरीर में देवी का वास होता है।
जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर मां मानकेश्वरी देवी का मंदिर है। यह मंदिर रायगढ़ राजपरिवार की कुलदेवी का है। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां निशा पूजा की जाती है, जो कि बल पूजा से एक रात पहले की जाती है। इस दौरान राजपरिवार बैगा के अंगूठे में नवरत्न की अंगूठी पहनाते हैं। बताया ये भी जाता है कि, बल पूजा के दिन बैगा के अंगूठे में अंगूठी कस जाती है। हालांकि इससे पहले या आम दिनों में अंगूठी ढीली रहती है। ये परंपरा से जुड़ी मान्यता है।
पूजा के बाद दी जाती है बकरों की बलि
इस साल शरद पूर्णिमा पर दोपहर बाद पूजा शुरू हुई। अत्यधिक और अनावश्यक भीड़ से बचने के लिए मंदिर परिसर में चारो ओर से बैरिकेडिंग की गई थी। ताकि बकरे लेकर पहुंचे श्रद्धालु और समिति प्रबंधन के अलावा अंदर अन्य लोग प्रवेश न कर सकें। शुरुआत में रीति-रिवाज से पूजा हुई। उसके बाद बलि परंपरा निभाई गई। इस बार करीब 50 से 60 बकरों की बलि दी गई। हालांकि, कुछ सालों में यह संख्या 100 से 120 तक पहुंच जाती है। मंदिर समिति के अनुसार, बैगा बकरों का खून पीता है। मान्यता है कि, बैगा के शरीर में उस वक्त देवी का वास होता है। फिर श्रद्धालु बैगा के पैर धोते हैं। उसके बाद सिर पर दूध डालकर पूजा करते हैं। समिति के सदस्यों ने यह भी दावा किया कि खून पीने के बाद बैगा के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव दिखाई नहीं देता।
मनोकामना पूरी होने पर बकरा चढ़ाते हैं श्रद्धालु
मंदिर की काफी मान्यता है। संतान प्राप्ति और बीमारी से मुक्ति की मनोकामना लेकर दूर दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। जिस श्रद्धालु की मनोकामना पूरी हो जाती वह यहां बकरा चढ़ाते हैं। मानकेश्वरी समिति के पूर्व अध्यक्ष युधिष्ठिर यादव के मुताबिक, बल पूजा की परंपरा करीब 500 साल पुरानी है।
रियासतकाल से चली आ रही परंपरा
राज्यसभा सांसद और रायगढ़ राजपरिवार के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मां मानकेश्वरी देवी की पूजा की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की मां के प्रति गहरी आस्था है और आज भी पुराने रीति-रिवाजों का पालन किया जा रहा है।

