साहू समाज एकादशी पूजा समारोह : भक्ति और सांस्कृतिक एकता का भव्य आयोजन
भक्त माता कर्मा मंदिर परिसर भारत माता चौक कोटा रोड । साहू समाज द्वारा आयोजित एकादशी पूजा समारोह इस वर्ष बेहद श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के साथ संपन्न हुआ। साथ ही गीता जयन्ती बारहवे अध्याय का पारायण किया गया पूरे समाज के लोग संध्या से ही पारंपरिक परिधानों में कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने लगे। धार्मिक अनुष्ठानों से कार्यक्रम के हर आयु वर्ग को जोड़ने का काम किया।
पूजा-अर्चना और अनुष्ठान
सांध्य के शुभ मुहूर्त में समाज के वरिष्ठजनों द्वारा विधि-विधान से गीता के श्लोकों का वाचन, और विशेष आरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान कृष्ण की और मां कर्मा की पूजा करते हुए समाज की उन्नति और परिवारों के कल्याण की प्रार्थना की।

भक्ति संगीत कार्यक्रम
पूजा के बाद आयोजित सांस्कृतिक सत्र में समाज के युवाओं और महिलाओं की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली।

भजन संध्या
ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। स्थानीय स्वजातीय बंधुओं और माताओं ने भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। साथ ही डॉ. दिव्या देशपाण्डे सहायक प्राध्यापक संस्कृत शा. संस्कृत महाविद्यालय रायपुर द्वारा कार्यक्रम में – गीता जयन्ती बारहवे अध्याय का पारायण किया गया |
समुदाय की एकजुटता का प्रतीक
समारोह के दौरान वक्ताओं ने साहू समाज की ऐतिहासिक परंपराओं, सामुदायिक एकजुटता और समाज कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। समाज के पदाधिकारियों ने शिक्षा, रोजगार और संगठनात्मक विकास से जुड़े नए प्रस्तावों की घोषणा भी की।

प्रसाद वितरण
पूजा के उपरांत आयोजित भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। समाज के युवाओं ने सेवा भावना के साथ प्रसाद वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पदाधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी, वरिष्ठजन, संगठन के जिम्मेदार सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस तरह के आयोजनों को समाज को एकजुट रखने का माध्यम बताया।

समारोह का समापन
अंत में प्रसाद वितरण के साथ सांध्य से चल रहे समारोह का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने अगले एकादशी और भी भव्य आयोजन की आशा व्यक्त की। कार्यक्रम ने सामाजिक सौहार्द और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम पेश किया।

श्रीमद्भगवतगीता का महत्त्व
मुख्य वक्ता डॉ दिव्या देशपाण्डे ने गीता जयन्ती के अवसर पर श्रीमद्भगवतगीता का महत्त्व प्रतिपादित करते हुए बताया कि गीता सनातन की परम्परा का सर्वमान्य धार्मिक ग्रन्थ है जिसका विश्व की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। श्रीमद्भागवत गीता महाभारत के भीष्म पर्व से लिया गया हैं ,जिसमें महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन के विषाद की स्थिति में 700 श्लोकों के माध्यम से श्रीकृष्ण के द्वारा अर्जुन को धर्म की रक्षा का उपदेश दिया गया |श्रीमद्भगवद्गीता में 18 अध्याय है जिसका प्रत्येक अध्याय अपने आप में महत्वपूर्ण है एवं विशिष्ट सिद्धांतों को लेकर समाज एवं राष्ट्र के हित में संदेश देता है |श्रीमदभगवदगीता मनुष्य को निष्काम कर्म करने की प्रेरणा देने वाला ग्रंथ है |समस्त द्वंदों से ऊपर उठकर किस प्रकार से जीवन को जीना चाहिए ?यह गीता जी का मुख्य संदेश है |यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में रचित है |यदि हमारे इस प्रकार के ग्रंथों की रक्षा करते हुए उन्हें भावी पीढ़ी को हस्तान्तरित करना है एवं यह संकल्प लेना है कि भावी पीढ़ी इन ग्रंथों का अध्ययन कर इससे प्रेरणा प्राप्त करें ,तो संस्कृत सीखना अनिवार्य है |संस्कृत भारती नामक संस्था संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए दृढ़ कटिबद्ध संस्था है जिसके अनेक आयाम समाज में संस्कृत के प्रचार प्रसार हेतु कार्य कर रहे हैं |जैसे बाल केंद्र, श्लोक पाठ केंद्र , संस्कृत पत्राचार पाठ्यक्रम संभाषण शिबिर आदि |ये आप सभी नि:शुल्क संस्कृत सीखना चाहते हैं तो संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं से संपर्क कर विभिन्न संस्कृत सम्वन्धी गतिविधियों से जुड़कर स्वयं हम एवं अपनी भावी पीढ़ी को संस्कृत का ज्ञान देकर श्रीमद्भगवद्गीता जैसे अनेकानेक धार्मिक ग्रंथों की परंपराओं के अध्ययन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

