संत श्री राम बालक दास जी के तत्वाधान में आयोजित ऑनलाइन सत्संग का लाभ सभी भक्त गण प्रातः 10:00 बजे उनके साथ जुड़कर प्रतिदिन लेते हैं और इस सत्संग में प्रत्येक भक्त की जिज्ञासाओं का समाधान भी बाबाजी के श्री मुख से किया जाता है
आज के ऑनलाइन सत्संग में हनुमान जी के पावन चरित्र को धारावाहिक रूप में प्रस्तुत करते हुए ठाकुर राम साहू जी ने संकट मोचन हनुमान जी के नाम पर प्रकाश डालने की विनती की और तीसरे छंद *अंगद के सँग लेन गये सिय*
*खोज कपीस यह बैन उचारो।*
*जीवत ना बचिहौ हम सो जु*
*बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।।*
*हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय*
*सिया-सुधि प्रान उबारो।।*
*को नहिं जानत हैं जगमें कपि*
*संकटमोचन नाम तिहारो ।।* पर प्रकाश डालते हुए
बाबा जी ने बताया कि जब मैया सीता की खोज में सुग्रीव ने यह घोषणा की कि जो भी सीता जी के बिना सुधि लिए आएगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा पूरी सेना लेकर के जब अंगद जी दक्षिण दिशा में गए और माता सीता को जब नहीं खोज पाए तब उनके प्राणों पर संकट आ गया तब हनुमान जी ने ही सीता मैया की सुध ले कर सब के प्राणों की रक्षा की
आगे चौथें छंद *रावन त्रास दई सिय को सब*
*राक्षसि सों कहि सोक निवारो।*
*ताहि समय हनुमान महाप्रभु*
*जाय महा रजनीचर मारो।।*
*चाहत सिय असोक सों आगि सु*
*दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।।*
*को नहिं जानत हैं जगमें कपि*
*संकटमोचन नाम तिहारो।।* के भावार्थ को बताते हुए बाबा जी ने बताया कि यह रचना गोस्वामी तुलसीदास जी के पूरे विश्व में ऐसी रचना है जहां पर एक एक शब्द का चयन बहुत ही ध्यान पूर्वक किया गया है, जब रावण ने सीता जी का हरण कर उन्हें अशोक वाटिका में रख कई तरह की यातनाएं दी तब जब हनुमान जी से मैया सीता मिली तो उन्हें बहुत ही सुखद अनुभव हुआ और वे हनुमान जी से कहती हैं कि फिर से वही दिन होगा फिर से वही रात होगी और वही कष्ट होंगे तब हनुमानजी मैया से कहते हैं कि मैं आपको इस अशोक वाटिका से ले जा सकता हूं मैया परंतु मैं चाहता हूं कि प्रभु राम ही आपको बंधन मुक्त कराये और यही मर्यादा होगी तब मैया भी उनसे कहती है कि मैं भी यही चाहती हूं कि मेरे प्रभु ही मुझे बंधन मुक्त कराएं
विजय शर्मा जी सहसपुर ने जिज्ञासा किया कि प्रदोष व्रत करने की क्या महत्व है, बाबाजी ने बताया कि यह प्रति माह में दो बार आता है एक कृष्ण पक्ष पर एक शुक्ल पक्ष पर तो आप पूरे महीने में भी है व्रत कर सकते हैं या पूरे साल में भी यह व्रत कर सकते हैं इसे करने के लिए आपको निराहार रहना आवश्यकता है कोई-कोई लोग इससे एक समय करते हैं परंतु यह उचित नहीं है आप इसे भगवान शिव जी के मंत्र पाठ के साथ करिए ओम नमः शिवाय का मंत्र जाप करके इसे किया जाता है मनुष्य जीवन के सारे दोषों को दूर करने के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण है
इस प्रकार आज का ऑनलाइन सत्संग संपन्न हुआ
जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम

