नेरल कॉलेज आफ साइंस आर्ट्स एंड कामर्स नवी मुंबई में संविधान दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में अधिवक्ता संघ सारंगढ़ के पूर्व उपाध्यक्ष अधिवक्ता दीपक तिवारी हुए शामिल…

सारंगढ़/ देश मे चल रहे डिजिटल क्रांति के दौर में युवाओं को डिजिटल इंडिया में 56 कोर्स संचालित करने वाली देश की एक मात्र महाविद्यालय नेरल कालेज ऑफ साइंस आर्ट्स एंड कामर्स में सविधान दिवस ऑन लाईन मनाया गया जिसमें अधिवक्ता संघ सारंगढ़ के पूर्व उपाध्यक्ष दीपक तिवारी मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में शामिल हुए।
उक्त कार्यक्रम में प्रिंट मीडिया टीवी समाचार समूह सहित इंडिया टुडे के पत्रकार तथा महाविद्यालय के छात्र छात्राओं एवं स्टॉफ सहित सामाजिक संस्था के सदस्य भी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या की देवी माता सरस्वती के तैल चित्र की पूजा अर्चना एवं संविधान के प्रस्तावना का पठन करके हुआ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता अधिवक्ता दीपक तिवारी ने स्वंत्रता के पूर्व संविधान निर्माण समिति ने 1 दिसम्बर से कार्य प्रारंभ से लेकर देशी रियासतों, चीफ कमिश्नर, अस्थायी समिति के अध्यक्ष सचिदानंद सिंहा की भूमिका, सविधान सभा के 12 महिला सदस्यों एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों तथा डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकृत किया गया जिसके कारण ही संविधान दिवस मनाया जाता है।
संविधान में हुए 126 व संशोधन नागरिक संशोधन बिल के बारे में भी बताया कि संविधान की आत्मा अनुच्छेद 32 में नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की उपचार हमें दिलाता है जिसमे बन्दी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेधाज्ञा, उत्प्रेसन, अधिकार पृच्छा हेतु सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार प्रदान करता है उन्होंने बताया संविधान की किताब जो विश्व का सबसे बड़ा हस्तलिखित है, जिसे शान्ति निकेतन के कलाकारों व्दारा सजाया गया था, रामायणकाल महाभारत सिंधुघाटी मुगल काल गुप्तकाल आदि के चित्र से उकेरा गया है तथा लिखने वाले प्रेम बिहारीं ने निःशुल्क लिखा है। संविधान के प्रत्येक पृष्ठ में उनका नाम और अंत पेज में उनके दादा का नाम लिखा गया है संविधान काली स्याही से निब वाली पेन से लिखा गया है जो वर्तमान में हीलियम गेस के केश में भारतीय संसद में रखा गया है।
श्री तिवारी ने बाबा भीमराव अंबेडकर जवाहर लाल नेहरू डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, जेपी कृपलानी, वलभ भाई पटेल आदि के अमूल्य योगदान पर भी प्रकाश डाला।
अंत मे संस्था व्दारा अतिथि गणों को अपना अमूल्य समय प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया गया।

