आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए 300 करोड़ रुपये के लोन मामले में दोषी ठहराया गया है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने पाया कि उन्होंने बैंक की आंतरिक नीतियों का उल्लंघन किया और अपने पति की कंपनी के जरिए रिश्वत ली।
पति की कंपनी के जरिए पहुंचा 64 करोड़ का फायदा
हितों के टकराव को छिपाया, शक्तियों का दुरुपयोग
न्यायाधिकरण ने माना कि चंदा कोचर ने अपने पति के कारोबारी हितों को बैंक से छिपाया और स्पष्ट रूप से हितों के टकराव को नजरअंदाज किया। लोन मंजूरी से लेकर पैसे ट्रांसफर होने तक की पूरी प्रक्रिया में उनके पद का दुरुपयोग साफ नजर आता है।
पहले से जब्त संपत्तियों की रिहाई पर भी रोक
न्यायाधिकरण ने इससे पहले संपत्तियों की जब्ती पर रोक लगाने के आदेश को भी पलटते हुए कहा कि ईडी द्वारा की गई कार्रवाई उचित थी। इस फैसले के बाद चंदा कोचर और उनके पति की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


