कोविड के उपचार में स्टेरॉयड के प्रयोग से बचें, ब्लैक फंगस का खतरा
· एम्स ने तीसरी लहर में रोगियों को ब्लैक फंगस से बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम प्रारंभ किया
· 12 विभाग की टीम पूर्व में ही कर चुकी है 217 रोगियों के जीवन की रक्षा
· पुराने रोगियों के पुनर्वास का प्रयास, अन्य विभागों में हो रहा है उपचार
· एक बार फिर संभावित रोगियों के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं
रायपुर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान विभाग के ईएनटी विभाग ने एक बार पुनः म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के संभावित केस को देखते हुए स्टेरॉयड के प्रयोग को लेकर जागरूकता का प्रसार करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दूसरी लहर के समान इस बार भी कोविड-19 के रोगियों ने बिना चिकित्सकों की निगरानी के स्टेरॉयड का प्रयोग किया तो ब्लैक फंगस के रोगियों की संख्या और अधिक हो सकती है। इसके साथ ही पुराने रोगियों के पुनर्वास के लिए भी सघन प्रयास किए जा रहे हैं।
एम्स में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए ही पूर्व से ही निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर के निर्देशन में एक दर्जन से अधिक विभागों की एक टीम कार्य कर रही है। प्रो. नागरकर ने बताया कि कोविड की दूसरी लहर में आए 252 रोगियों में से 217 रोगियों का ऑपरेशन कर उन्हें ठीक किया गया था। देशभर में यह किसी चिकित्सा संस्थान में किए गए सर्वाधिक ऑपरेशन में से एक था। इसके लिए सात विशेष म्यूकरमाइकोसिस वार्ड बनाए गए थे जबकि तीन ऑपरेशन थियेटर को प्रति सप्ताह छह दिन ऑपरेशन के लिए आरक्षित कर दिया गया था और दो आईसीयू इन रोगियों के लिए आरक्षित थे। एक बार पुनः इस टीम को कार्यशील कर दिया गया है।
अभी ईएनटी, नेत्र रोग, न्यूरो सर्जरी, डेंटल, मेडिसिन, एंडीक्रायनोलॉजी, पल्मोनरी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, क्लीनिकल फार्माकोलॉजी और पैथोलॉजी विभागों के चिकित्सक मिलकर ब्लैक फंगस के इलाज की तैयारी कर रहे हैं। ईएनटी विभाग की डॉ. रूपा मेहता ने बताया कि विभाग निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर स्टेरॉयड के प्रयोग में सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है। रोगियों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे होम आइसोलेशन में स्वयं स्टेरॉयड का प्रयोग न करें। स्टेरॉयड का प्रयोग चिकित्सकों की निगरानी में गंभीर स्थिति में ही किया जाना चाहिए।
प्रो. नागरकर ने बताया कि पूर्व में ठीक होकर जा चुके 217 रोगियों के पुनर्वास का दायित्व भी एम्स के विभिन्न विभाग निभा रहे हैं। अब ऐसे रोगियों को डेंटल इंप्लांट, प्लास्टिक सर्जरी और अन्य चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं ताकि वे सामान्य जीवन यापन कर सकें। पुराने रोगी भी नियमित स्क्रिनिंग के लिए विभाग आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोविड-19 के रोगी नियमित स्क्रीनिंग करवाएं तो उन्हें ब्लैक फंगस से बचाया जा सकता है।

