नवंबर को मदकूद्वीप आएंगे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत 19 नवंबर को मदकूद्वीप प्रवास पर आएंगे। तीन घंटे के प्रवास के दौरान बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली व भाटापारा-बलौदाबाजार के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों से चर्चा के बाद विभिन्न समाज प्रमुखों को संबोधित करेंगे। शनिवार को समरसता विभाग के प्रांत प्रमुख शांताराम सराफ की अध्यक्षता में मदकूद्वीप में बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली व भाटापारा-बलौदाबाजार के आरएसएस के पदाधिकारियों की बैठक हुई। तीन घंटे चली बैठक में संघ्ा प्रमुख के प्रवास के दौरान उनके साथ चर्चा में मौजूदगी को लेकर रणनीति बनी।
इसके बाद संघ व भाजपा के पदाधिकारियों की सामूहिक बैठक हुई। 19 नवंबर को संघ प्रमुख मोहन भागवत के प्रवास को लेकर संघ के पदाधिकािरयों व भाजपा के सांसद व विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक भागवत 19 नवंबर को रायपुर से सड़क मार्ग से मदकूद्वीप पहुंचेंगे। मदकूद्वीप प्रवास के दौरान मंदिरों में पूजा अर्चना के बाद विश्राम करेंगे। समाज प्रमुखों के बीच बैठकर भोजन करेंगे। इसके बाद तीन जिलों के आरएसएस के पदाधिकारियों व स्वयंसेवकों की मीटिंग लेंगे।
संगठनात्मक कामकाज को लेकर चर्चा करेंगे। संघ के पदाधिकारियों से चर्चा के बाद विभिन्न् समाज प्रमुखों, स्वयंसेवकों व ग्रामीणों को संबोधित करेंगे। शनिवार को समरता विभाग के प्रांत प्रमुख शांताराम सराफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अस्र्ण साव, मुंगेली के विधायक पुन्नूलाल मोहले, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, विधायक शिवरतन शर्मा, विधायक रजनीश सिंह, प्रदेश प्रवक्ता भूपेंद्र सवन्नी, संघ के पदाधिकरी नरेंद्र शर्मा, बब्बू शुक्ला सहित संघ के प्रमुख पदाधिकरियों की उपस्थिति रही।
पुरातात्विक महत्व
शिवनाथ नदी के तट पर स्थित मदकूद्वीप में उत्खनन से ग्यारहवीं शताब्दी के मंदिर मिले हैं। इसमें गणेशजी की अलग-अलग मुद्राओं में 11 प्रतिमाएं हैं। द्वीप पर प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष, प्राचीन यज्ञशाला भी पुरातत्व विभाग की देखरेख में की गई खोदाई में मिले हैं। उत्खनन निदेशक अस्र्ण कुमार शर्मा ने मदकूद्वीप को दसवीं-ग्यारहवी शताब्दी का प्राचीन धार्मिक स्थल बताया है। इसे मांडूक्य ऋषि का तपोस्थली होना भी बताया है। उत्खनन में भगवान गणेश की अलग-अलग मुद्राओं की प्रतिमा के अलावा चार शिव मंदिर और दो योनी पीठ मिल चुके हैं।

