रायगढ़ : लामीदरहा में शासकीय आवंटन जमीन की अवैध खरीद-बिक्री मामले में पटवारी ने जांच करके प्रतिवेदन सौंपा था। बताया जा रहा है कि एसडीएम ने तहसीलदार को प्रतिवेदन वापस कर दिया। इसमें पटवारी से अभिमत मांगा गया है। अब तो लामीदरहा का पटवारी भी बदल गया है। जांच रिपोर्ट को अभिमत के साथ प्रस्तुत करने को कहा गया है।लामीदरहा में खसरा नंबर 34 राजस्व अभिलेखों में बड़े झाड़ के जंगल और शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी।
यह जमीन बहुत सारे राज समेटे हुए हैं। सरकार ने जीवन-यापन के लिए भूमिहीनों को जमीन दी थी लेकिन अब इसके मालिक दूसरे लोग हो गए। नियमतः शासकीय पट्टे की भूमि को बिना कलेक्टर की अनुमति के नहीं बेचा जा सकता, लेकिन एक भी टुकड़ा अब प्रारंभिक आवंटियों का नहीं रहा।
खसरा नंबर 34 की शासकीय भूमि रकबा कुल रकबा 29.388 हे. था। 72.62 एकड़ में से एक टुकड़ा खनं 34/16 रकबा 0.6070 हे. को गरहन चौहान को आवंटित किया गया था। इस जमीन को मनोज गुप्ता पिता स्व. चंद्रप्रकाश गुप्ता निवासी बैकुंठपुर को बेचने के लिए गरहन ने कलेक्टर के समक्ष अर्जी लगाई थी। 5 अप्रैल 2023 को कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण दर्ज हुआ। कलेक्टर ने प्रकरण दर्ज कर प्रतिवेदन के लिए एसडीएम रायगढ़ को भेजा। एसडीएम रायगढ़ ने तत्कालीन तहसीलदार को प्रकरण भेजा। तहसीलदार ने प्रतिवेदन भेजने के बजाय खुद बिक्री नकल देने के लिए प्रकरण दर्ज किया। 9 फरवरी 2024 को पटवारी जलंधर सिदार को बिक्री नकल देने का आदेश दिया। 4 मार्च 2024 को गरहन चौहान ने जमीन मुकुल कुमार सिन्हा निवासी कोरबा और प्रदीप पटेल निवासी लेंध्रा बरमकेला को बेच दी।
पटवारी ने प्रतिवेदन दिया था। एसडीएम ने अभिमत के साथ दोबारा प्रतिवेदन देने का आदेश दिया है।

