छत्तीसगढ़ विधानसभा में 14 घंटे तक चली जोरदार बहस, अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिरा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में शनिवार को राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा। कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव लगभग 14 घंटे तक चली लंबी बहस के बाद ध्वनिमत से खारिज हो गया। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे पूरे दिन विधानसभा की कार्यवाही चर्चा का केंद्र बनी रही।

विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता अनेक समस्याओं से जूझ रही है और सरकार इन मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही है।
वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार सुशासन, विकास और जनता के विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों के हित में लिए गए फैसलों, आदिवासी क्षेत्रों के विकास तथा नक्सल प्रभावित इलाकों में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तथ्यों के बजाय राजनीतिक आरोप लगाने का भी आरोप लगाया।

लंबी बहस के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई, जिसमें अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया। इसके साथ ही सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र की यह बहस आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति पर असर डाल सकती है। सत्ता पक्ष इसे अपनी नीतियों पर जनता के विश्वास का प्रतीक बता रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा।

यह घटनाक्रम पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर भी विधानसभा की कार्यवाही से जुड़े वीडियो और बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

