प्रतिदिन की भांति संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा ऑनलाइन सत्संग का आयोजन सीता रसोई संचालन ग्रुप एवं उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में एक साथ प्रातः 10:00 बजे आयोजित किया गया जिसमें भक्त गणों की विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान संत श्री के द्वारा किया गया
ठाकुर राम साहू जी ने जिज्ञासा रखी थी श्री पापांकुशा एकादशी व्रत की कथा बताएं, बाबा जी ने बताया कि प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था। वह बड़ा क्रूर था। उसका सारा जीवन पाप कर्मों में बीता। – जब उसका अंत समय आया तो वह मृत्यु के भय से कांपता हुआ महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचकर याचना करने लगा- हे ऋषिवर, मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं।, अंगिरा ऋषि ने उन्हें विधि वत एकादशी पर्व के व्रत को करने का उपाय बताएं, वर्ष में आने वाली 24 एकादशी को आप करो और कम से कम अन्न खाकर फल आदि के द्वारा यह व्रत करें, और बहेलिया ने उनके बताए अनुसार यह व्रत किया और धीरे-धीरे उसकी सारी गलानिया दूर होने लगी इस प्रकार से एकादशी व्रत की महत्तम है कि हाथी जैसा बड़ा महानतम पाप भी क्यों ना हो वह एकादशी ब्रत करने से दूर हो जाता है
सुंदरलाल जी ने जिज्ञासा रखी की “दया ही धर्म का मूल है” पर प्रकाश डालें प्रभ
इस वाक्य को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि जिस तरह से वृक्ष के फल पत्ते और तने पर जल डालने से वह जीवित नहीं रहता उसकी जड़ों में जल डालने पर वह जीवित रहता है, और यदि आप पेड़ के सभी अंगों को पोषण दें और जड़ो को काट दे तो वह पेड़ जीवित नहीं बचेगा, वैसे ही आपके मन और जीवन से जब दया के भाव खत्म हो जाएंगे, तो धर्म की जितने भी कार्य हम करते हैं वह व्यर्थ है
इस प्रकार आज का ऑनलाइन सत्संग संपन्न हुआ
जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम

