,, लोककल्याण के लिये किये गये सभी सद्कर्म यज्ञ हैं -,, संत राम बालक दास महात्यागी
ग्राम पेंड्री धमधा में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम कथा के प्रथम दिवस यज्ञ के महत्तम पर बोलते हुए संत श्री राम बालक दास जी ने बताया कि यह संसार यज्ञमय है। यहाॅ जितने भी अच्छे कार्य होते हैं वे सभी यज्ञ के समान ही हैं। यज्ञ से देवता संतुष्ट होते हैं। यज्ञ ही समस्त चराचर जगत का प्रतिष्ठापरक है। यज्ञ पृथ्वी को धारण किये हुये है। अन्न से प्राणी जीवित रहते हैं वह अन्न वर्षा द्वारा उत्पन्न होता है और वर्षा की उत्पत्ति यज्ञ से होती है।
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यज्ञ का महत्व बताते हुये संत श्री रामबालकदास जी ने कहा कि लोक कल्याण के लिये किया गया सद्कर्म ही यज्ञ है। उदार सहृदयता, समाज परायणता और विश्व कौटुंबिकता इन तीन सत्प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व यज्ञ के माध्यम से होता है। यज्ञ के जरिये शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शांति, आत्म शुद्धि, आत्मबल वृद्वि, आध्यात्मिक उन्नति और आरोग्य की रक्षा होती है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा स्वाॅस को अपने ही स्वाॅस में आहूत करने वाले का जीवन यज्ञमय है। घर की रसोईशाला भी यज्ञशाला है यहाॅ प्रज्वलित अग्नि यज्ञशाला की ही अग्नि है। हमारे पेट की जठराग्नि भी यज्ञशाला की अग्नि स्वरूप ही है जिसमें हविष्यान्न के रूप में हमें पवित्र भोजन की आहुति डालनी चाहिये। विद्याध्ययन के लिये विद्यालय गये विद्यार्थी की यह यज्ञशाला जहाॅ का शिक्षक वेदांती ब्राह्मण पुस्तक कापी हवन कुण्ड तथा अक्षर उसकी आहुति है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश भी यज्ञशाला में प्रवेश के समान है संसार की समस्त चिंतायें कलह कार्य अग्निकुण्ड के समान है। यहाॅ अपने कर्तव्यों की आहुति देने वाला सद्गृहस्थ याज्ञिक ब्राह्मण की तरह जीवन जीता है। इसलिये कहा गया है यह संपूर्ण जगत् यज्ञमय है।
दिनांक 24 फरवरी से 3 मार्च तक चलने वाले श्री जामली पाटेश्वर धाम के संचालन में यह 98 मा महायज्ञ है जिसका सीधा प्रसारण श्री पाटेश्वर धाम के यूट्यूब चैनल
,, Rambalakdas ,,
पर किया जा रहा है

