Hospital Emergency Scam: साइबर ठगों ने अब ठगी का नया तरीका अपनाया है। कभी बैंक अधिकारी तो कभी परिचित बनकर लोगों को निशाना बनाने वाले जालसाज अब अस्पताल में आपातकालीन स्थिति का बहाना बनाकर भी लोगों की जमा पूंजी हड़प रहे हैं। ऐसा ही मामला कोरबा में एसईसीएल से सेवानिवृत्त एक कर्मचारी के साथ सामने आया है। ठग ने खुद को लुधियाना का व्यापारी बताकर अस्पताल में भर्ती होने की कहानी सुनाई और गलती से खाते में पैसे ट्रांसफर होने का झांसा देकर उनसे 3.85 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए।
पुराने परिचय को बनाया ठगी का हथियार
पीड़ित सोमेन कुमार विश्वास (61) एसईसीएल से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने रिटायरमेंट पर मिली रकम से कारोबार शुरू करने की योजना बनाई थी। इसी सिलसिले में हाल ही में उन्होंने कपड़ों के कारोबार के लिए लुधियाना से खरीदारी की थी। वहां उनकी मुलाकात सौरभ नाम के एक व्यापारी से हुई थी। जालसाज ने इसी परिचय का फायदा उठाकर ठगी की पूरी पटकथा तैयार की।
मोबाइल पर दिखा ‘सौरभ’ नाम, बिना पुष्टि भेज दिए 3.85 लाख
18 अक्टूबर को विश्वास के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। हैरानी की बात यह थी कि मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम ‘सौरभ’ दिखाई दे रहा था। फोन करने वाले ने खुद को लुधियाना का व्यापारी बताते हुए कहा कि वह अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में है। उसने दावा किया कि गलती से उसके खाते से पैसे विश्वास के खाते में ट्रांसफर हो गए हैं। अस्पताल में परेशानी का हवाला देते हुए उसने तत्काल रकम वापस करने की गुहार लगाई।
परिचित का नाम स्क्रीन पर देखकर विश्वास को उसकी बात पर भरोसा हो गया। उन्होंने बिना बैंक खाते में आई रकम की पुष्टि किए और संबंधित व्यापारी से दूसरे नंबर पर संपर्क किए 3.85 लाख रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पत्नी ने जताया संदेह, तब खुला ठगी का राज
रकम ट्रांसफर करने के बाद जब उन्होंने पत्नी को पूरी बात बताई, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पत्नी ने मामले पर संदेह जताया और जांच करने को कहा। तब तक काफी देर हो चुकी थी। उनकी सेवानिवृत्ति की जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा साइबर ठग के खाते में जा चुका था।
साइबर ठगों का नया पैंतरा: भरोसा, इमरजेंसी और जल्दबाजी
इस घटना में ठग ने तीन स्तरों पर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। पहले पुराने परिचित का नाम दिखाकर भरोसा पैदा किया, फिर अस्पताल में आपातकालीन स्थिति का हवाला देकर भावनात्मक दबाव बनाया और अंत में तत्काल पैसे लौटाने की जल्दबाजी दिखाई।

