Dhamtari News: देवेंद्र कुमार मिश्रा। धमतरी दीपावली का पर्व नजदीक है बाजारों में रौनक बढ़ रही है, घरों में तैयारियां चल रही हैं, लेकिन धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में आगजनी की घटना से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की व्यवस्था ही नहीं है करीब 2.57 लाख से अधिक आबादी वाले विधानसभा क्षेत्र में दमकल की गाड़ी उपलब्ध नहीं होने का दावा जिला के प्रशासन की आपदा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
2011 की जनगणना के आधार पर प्रस्तुत अनुमान के मुताबिक, नगरी विधानसभा क्षेत्र की आबादी 2,57,616 से अधिक बताई जा रही है इसमें लगभग 92.4 प्रतिशत ग्रामीण और 7.6 प्रतिशत शहरी आबादी है इतनी बड़ी आबादी की सुरक्षा के लिए अग्निशमन व्यवस्था की उपलब्धता बेहद जरूरी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर दमकल की गाड़ी नहीं होने से आपातकालीन स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
25 मई का हादसा, लेकिन पांच महीने बाद भी सवाल बरकरार
बीते 25 मई को धमतरी के ट्रेंचिंग ग्राउंड में लगी आग बुझाने के लिए नगरी से फायर ब्रिगेड की गाड़ी धमतरी बुलाई गई थी वापसी के दौरान वाहन हादसे का शिकार हो गया, जिसमें नगर पंचायत के दो कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हो गई यह हादसा दो परिवारों के लिए कभी न भरने वाला दुख छोड़ गया लेकिन घटना के करीब पांच महीने बाद भी नगरी में फायर ब्रिगेड की स्थायी व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं
दीपावली करीब, खतरा बड़ा और तैयारी कहां?
दीपावली के दौरान पटाखों, बिजली की सजावट, दुकानों और रिहायशी इलाकों में आग लगने की आशंका बढ़ जाती है ऐसे में यदि नगरी या आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कोई बड़ी आगजनी होती है, तो धमतरी से दमकल पहुंचने में लगने वाला समय बेहद अहम साबित हो सकता है दोनों स्थानों के बीच सड़क दूरी करीब 80 किलोमीटर बताई जाती है आग लगने के शुरुआती मिनटों में त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है ऐसे में स्थानीय दमकल व्यवस्था का अभाव जान-माल की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
जिम्मेदार कौन और जवाब देगा कौन?
सवाल जिला प्रशासन, नगरी के स्थानीय निकाय और अग्निशमन व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों से है, क्या पांच महीने में नगरी के लिए दमकल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जा सकती थी? क्या दीपावली से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है? और अगर कोई बड़ी घटना हो गई, तो तत्काल राहत और बचाव की जिम्मेदारी किसकी होगी यह मामला केवल एक फायर ब्रिगेड वाहन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की सुरक्षा का है प्रशासन को तत्काल स्थिति स्पष्ट करते हुए नगरी में दमकल की स्थायी या प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए हादसे के बाद भी अगर व्यवस्था नहीं सुधरी, तो सवाल उठना लाजिमी है क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

