हमें दो कदम भी नापना हो तो पैरों की जरूरत पड़ती है. जीवनयापन के लिए कठिन संघर्ष, परिवार का सहारा बनना, बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उठाने जैसे जीवन के कई पहलू है जिसे परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाला व्यक्ति भली-भांति समझता है. जीवन की इस आपाधापी में अगर किसी दुर्घटनावश पैर काम करना बंद कर दे तो जीवन का यह संघर्ष और भी कठिन हो जाता है.
दुर्घटना की वजह से अपने चलने-फिरने की क्षमता खो चुके विलियम तिग्गा, राजकुमार राम और नरेन्द्र कुमार इस दर्द को महसूस कर रहे थे. कमजोर आर्थिक स्थिति इस संघर्ष को और भी कठिन बना देता है. तीनों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आकर अपनी व्यथा बताई और ई-रिक्शा की मांग की ताकि फिर से वे इस सहायक उपकरण की वजह से अपना काम आसान बना सके.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सीएम कैंप कार्यालय बगिया मानवीय संवेदनाओं का केंद्र बन गया है. कार्यालय में जनसमस्या का निवारण तत्परता से किया जा रहा है. उम्मीद और आश लेकर पहुंचने वाले लोग यहां से एक मुस्कुराहट के साथ वापस जाते हैं.



