रायपुर. जिला अस्पताल में जिस बच्ची की महिला पुलिस वालों ने पिटाई की उसकी दि-ब-दिन हालत बिगड़ते जा रही है। इस संबंध में महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग को संज्ञान में लेकर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग परिजनों ने की है। पीडि़त परिवार के साथ समाज ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। पुलिस लाइन स्थित जिला अस्पताल महिला और बच्चियों के साथ परिजनों के लिए भयावह साबित हो रहा है।
वहां पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ मारपीट आम बात हो गई है। बुधवार रात को एक बच्ची वहां भर्ती अपनी मां से मिलने के लिए जा रही थी, उसके पास मरीज अटेंडर पास भी था, उसके बाद भी वहां तैनात तीन महिला पुलिसकर्मियों ने उसे मां से मिलने नहीं दिया और गाली देते हुए जमकर पिटाई कर दी, जिससे बच्ची बेहोश हो गई उसे इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बच्ची के साथ वहां तैनात महिला पुलिस ने दुव्र्यवहार करने के साथ गेटपास फाड़ दिया और जमकर पिटाई कर दी, उसे 112 वाहन बुलाकर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। विदित हो कि कुछ माह पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया दिल्ली के एक अस्पताल में व्यवस्था का जायजा लेने बिना सूचना के पहुंच गए वहां तैनात गार्ड ने उनके साथ हाथापाई की, इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस वाले बिना किसी वजह से किसी की भी पिटाई कर सकती है। ताजा मामले में पुलिस का डंडा राज साफ दिखाई पड़ रहा है।

