बच्चों का जीवन अधर में लटका कर विभाग नवनी करण में कर रहा है लेटलतीफी जानकारों की माने तो नवीकरण के बजाय विभाग को औचक निरीक्षण कर कमियों को खोज कर उन्हें पूरा करवाना चाहिए ना कि वनीकरण के नाम पर वर्षों तक मामले को लटका कर रखा जाए
शाला का नवीनीकरण ही पूरा बंद कर देना चाहिए जब एक बार मान्यता ले ली स्कूल का संचालन होता रहे विभाग को यदि लगता है कि स्कूल में कुछ कमी है तो ओचक निरीक्षण करें व कमी पाए जाने पर सीधे स्कूल को बंद कर दे ,जहां तक मुझे लगता है कि ऐसा कोई स्कूल नहीं मिलेगा जो बंद होने की स्थिति में कमी पाई जाए , और यदि कमी पाई गई है तो पूरा करने को पर्याप्त समय दिया जाए पर्याप्त समय में कमी पूरी नहीं होने पर निसंकोच शाला बंद कर दे विभाग को जब जहां जैसे औचक निरीक्षण किया जाना है करता रहे। नवीनीकरण भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है नवीनीकरण की आड़ में विभाग द्वारा छोटे बड़े स्कूलों से क्या चाह रहा है चाहे वह आरटीई की राशि हो या नवनीकरण हो इन दोनों कामों में ही विभाग लेटलतीफी दिखा रहा है कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है। ज्ञात हो कि कुछ समय से प्राइवेट स्कूल व विभाग में खींचातानी लगातार जारी है प्राइवेट स्कूल वालों का कहना है कि विभाग नवनी करण में बहुत देर कर दी है कई मामले तो 3 सालों से लटके हुए हैं विभाग में पदस्थ कर्मचारी को इतना भी फुर्सत नहीं है कि वह 2 सालों में एक स्कूल का नवीनीकरण न कर सके कितनी लंबे समय से शाला का नवीनीकरण ना करना कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार को आमंत्रित करता है विभाग के संबंधित व जिम्मेदार अधिकारी को इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहिए इतने लंबे समय से मामला लटका हुआ है तो फिर उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी होगा ही अब देखते हैं मामला कहां पर आकर अटकता है यदि विभाग चाहे तो स्मार्ट वर्क में 1 महीने में ही सारे स्कूलों का नवीनीकरण प्रदान कर सकता है लेकिन यदि जांच करना चाहे तो वह भी इतने लंबे समय तक नहीं होना चाहिए की स्कूल के बच्चे नवीनीकरण के चक्कर में अपना जीवन अधर पर लटकाए हुए हैं विभाग और प्राइवेट स्कूलों की खींचतान में कहीं बच्चों का भविष्य ना लटक जाए स्कूल प्रारंभ होने के पश्चात यदि किसी स्कूल का नवीनीकरण नहीं होता है तो फिर उन बच्चों की जिम्मेदारी किसकी होगी विभाग की या प्राइवेट स्कूलों की प्राइवेट स्कूलों ने तो समय रहते अपना नवनी करण जमा कर दिया है अब देखते हैं विभाग के इस बारे में क्या करता है क्या सोचता है वह अपनी जिम्मेदारी कहां तक निभाता है
नवीनीकरण में उसी जान कारी को बार बार देते है क्या यह स्मार्ट वर्क हूवा । अपने विचार हमे मेल करे

