जानकी – चैप्टर 1 (2025) — छत्तीसगढ़ की रिलीज़ की गई पहली हिन्दी फिल्म, के बारे में जो जानकारी और विवाद सामने आये हैं, उनका एक समीक्षा-जैसा अवलोकन है। ध्यान दें कि फिल्म अभी सार्वजनिक रूप से सिनेमा हॉल या ओटीटी पर पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाई है — इसलिए “पूर्ण समीक्षा” देना ठीक नहीं, लेकिन उपलब्ध जानकारियों के आधार पर मैं अपनी राय दे रहा हूँ।
✅ क्या खास है — जानकी की बातें जो महत्वपूर्ण हैं
जानकी – चैप्टर 1 को बताया जा रहा है कि यह “छत्तीसगढ़ से बनी पहली हिन्दी फीचर फ़िल्म” है।
फिल्म का उद्देश्य था — “छत्तीसगढ़ी मिट्टी, संस्कृति और लोक-बोलियों को लेकर हिन्दी भाषा में देशभर के दर्शकों तक पहुँचना”।
मेकिंग टीम: निर्देशक कौशल उपाध्याय, प्रोड्यूसर-एक्शन डिज़ाइनर मोहित साहू। मुख्य किरदारों में अनिकृति चौहान (जानकी), दिलेश साहू (रघु) शामिल हैं।
इसके संगीत और गानों के लिए — नामी-गायकों को लिया गया है, जिससे प्रतीत होता है कि फिल्म को स्थानीय (छत्तीसगढ़ी) + हिन्दी दर्शकों दोनों के लिए बनाया गया है।
मतलब — लक्ष्य साफ था: छत्तीसगढ़ी फ़िल्म (छॉलीवुड) और हिन्दी सिनेमा का सेतु बनना, लोक की पहचान को बड़े पर्दे पर दिखाना।
⚠️ क्या दिक्कतें / चुनौतियाँ सामने आई हैं
सबसे प्रमुख — रिलीज़ नहीं हो पाई (या बहुत सीमित) : Central Board of Film Certification (CBFC) ने “जानकी” नाम पर आपत्ति जताते हुए फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया।
इसलिए — उसकी रिलीज़ डेट (पहले 13 जून 2025 घोषित थी) टल गई।
विवाद इतना बढ़ा कि प्रोड्यूसर ने न्यायालय की राह पकड़ी — कोर्ट तक जाने की बात कही गई।
मतलब यह कि — आम दर्शकों द्वारा फिल्म देखे जाने का मौका फिलहाल नहीं मिला / सीमित रहा। इस वजह से “कहानी, अभिनय, निर्देशन, संगीत” आदि के आधार पर समीक्षाएँ बहुत कम या अधूरी ही हो पाईं।
🎯 मेरी राय — संभावनाएँ और चुनौतियाँ
अगर फिल्म रिलीज़ हो जाती, तो “छत्तीसगढ़ की संस्कृति + हिन्दी माध्यम + लोक भावना” — यह कॉम्बिनेशन उसका सबसे बड़ा ताकत होता।
मगर, अभी हुआ जो विवाद — वह दिखाता है कि सिर्फ अच्छा इरादा और लोक-कहानी पर्याप्त नहीं होती; सामाजिक-राजनीतिक पहलुओं और सेंसर बोर्ड जैसी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
इसलिए जानकी — एक साहसिक पहल है। लेकिन अस्थिरता (कानूनी/सर्टिफिकेशन) के कारण, उसका लक्ष्य “छॉलीवुड का विस्तार” फिलहाल पूरा नहीं हो पाया लगता है। जो कि बहुत जल्द पूरा हो जायेगा
📌 निष्कर्ष (Verdict)
“जानकी – चैप्टर 1” — एक महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक कदम था, जो छत्तीसगढ़ी सिनेमा को हिन्दी मंच तक ले जाने का प्रयास था। उसकी भावना और लक्ष्य स्वीकारने लायक है; लेकिन जिस तरह से सर्टिफिकेशन विवाद और रिलीज़ टलने जैसा मामला सामने आया — उससे पता चलता है कि पैकेज (कहानी + कलाकार + संगीत) के साथ साथ ‘समय, रिलीज प्लेटफार्म, संवेदनशीलता’ जैसी चुनौतियाँ भी होती हैं। जिसे पार कर आखिर कार जानकी 12 दिसंबर से पूरे भारत वर्ष में रिलीज हो रही है

